देवलोक 2 : पौराणिक गाथाओं के रोचक संसार की यात्रा

यह प्रयास किया गया है कि कहानियों का मर्म न बदले. पाठक इनमें छिपे तत्वज्ञान को समझ सकें.

देवदत्त पटनायक अपनी नयी किताब ‘देवलोक-2’ से पौराणिक गाथाओं के उस संसार से हमें रुबरु करा रहे हैं जिससे हम अनजान थे। उनका यह सफर हर पन्ने के साथ रोचक होता जाता है।

‘एपिक’ टेलिविजन चैनल के देवलोक: देवदत्त पटनायक के संग के पहले सीजन की सफलता के बाद पाठकों ने उनसे पौराणिक कथाओं के बारे में प्रश्न पूछे, जिनका उन्होंने धारावाहिक की कडि़यों में जवाब दिया। यह प्रश्न और उत्तर की ऐसी रोचक पुस्तक है जिसमें रामायण से लेकर महाभारत काल की जानकारी मिलेगी।

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पेंगुइन बुक्स और मंजुल पब्लिशिंग हाउस के साझा सहयोग से प्रकाशित ‘देवलोक -देवदत्त पटनायक के संग 2’ का हिन्दी अनुवाद रचना भोला यामिनी ने किया है। उन्होंने उस प्रवाह को खत्म नहीं होने दिया जो देवदत्त पटनायक ने रचा है। रचना की खूबी यह है कि वे स्वयं पाठक के रुप में या श्रोता बनकर अनुवाद करती हैं, ताकि शब्दों की ताकत बिखरे नहीं, उसे महसूस किया जा सके। इससे पूर्व देवदत्त की ‘सीता’ का बेहतरीन अनुवाद भी उन्होंने ही किया था।

क्या हनुमान ने भी रामायण लिखी थी?
कर्ण मृत्यु के बाद नर्क जाता है?
क्या जगन्नाथ कृष्ण का रुप हैं?

साथ ही देवदत्त ने आस्तिक और नास्तिक शब्द का वास्तविक अर्थ व अंतर बताया है। ध्यान और दर्शन, वन और क्षेत्र, आत्मा, देवी-देवता, असुर, आदि से जुड़े उन प्रश्नों का हल किया है जो अनुत्तरित थे। हर प्रश्न हमारी जिज्ञासा बढ़ाता है और उसे देवदत्त बहुत ही सहज ढंग से शांत करने में कामयाब रहे हैं। वे हमें हिंदू पौराणिक गाथाओं के रोचक संसार की यात्रा पर ले जाते हैं।

इस पुस्तक में कथाओं के माध्यम से उन सवालों के जवाब देने की सार्थक कोशिश की गयी है जो हमारे मन में समय-समय पर उठते हैं या हम उन्हें सोचते हैं, लेकिन उनके उत्तर कहीं मिलते नहीं. यदि मिलते हैं तो संतुष्ट नहीं करते. वाकई यह संग्रह करने वाली किताब है.

लेखक ने सीता और द्रोपदी के जन्म, स्वयंवर, प्रेम, मृत्यु की कथायें को सरल तरीके से पाठकों को बताया है।

सीता और द्रोपदी के मंदिरों के बारे में देवदत्त लिखते हैं:
‘ऐसे कुछ मंदिर तो हैं परंतु वे बहुत लोकप्रिय नहीं कहे जा सकते। ग्राम देवियों के मंदिर होते हैं और लोक कथाओं में भी उनका परिचय पाया जाता है। सीता का एक मंदिर मिथिला में, नेपाल के दक्षिणी हिस्से में है जहां मैथिली बोली जाती है और सीता को बहुत महत्व दिया जाता है। नेपाल के जनकपुर में जानकी का मंदिर है। हरियाणा में, करनाल में सीता माई का मंदिर है। केरल के वेन्नाड में सीता देवी का मंदिर है जहां वे लव और कुश के साथ पूजी जाती हैं। श्रीलंका में, नुवारा एलिया में, सीता अम्मन का मंदिर है।

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द्रौपदी ग्राम देवी के रुप में पूजी जाती हैं और मंदिर मुख्यतः आंध्र, कनार्टक व तमिलनाडु राज्यों में पाए जाते हैं। तमिलनाडु के अरकोट जिले में आपको द्रौपदी अम्मा के अनेक मंदिर मिलेंगे। वहां उन्हें दुर्गा व काली के रुप में पूजा जाता है। वे महाभारत पर आधारित दृश्यों का मंचन भी करते हैं ताकि देवी को प्रसन्न किया जा सके।’

हल्दी, चंदन, कुमकुम और भस्म पर देवदत्त पटनायक ने कथाओं द्वारा उनके महत्व का वर्णन किया है। अतिथि के स्वागत के लिए हल्दी, चंदन व चावल का तिलक क्यों किया जाता है? चंदन और भस्म का संबंध किससे है? ऐसे ही तमाम सवालों का रोचकता के साथ जवाब दिया गया है।

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हिन्दू धर्म के अलावा देवदत्त ने अपनी पुस्तक में जैन, बौद्ध और इसाई धर्म की बात भी की है। उन्होंने आत्मा, परमात्मा, मोक्ष, निर्वाण, पुनर्जन्म आदि का विस्तारपूर्वक वर्णन किया है।

देवलोक-2 के माध्यम से शास्त्रों और लोक कथाओं में मिलने वाली पौराणिक कथाओं को सरलता से कहा गया है। यह प्रयास किया गया है कि कहानियों का मर्म न बदले। पाठक इनमें छिपे तत्वज्ञान को समझ सकें।

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लेखक: देवदत्त पटनायक
प्रकाशक: मंजुल प्रकाशन - पेंगुइन रैंडम हाउस
पृष्ठ: 248
अनुवाद : रचना भोला 'यामिनी'
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