मथुरा ईश : कृष्ण को नर से नारायण बनाने की कहानी

'ईश जिसे मानो उससे प्रेम करो, भयभीत न हो. ईश डरने का नहीं प्रेम करने का नाम है'
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मथुरा ईश : संजय त्रिपाठी की कृति.
लेखक संजय त्रिपाठी ने ‘मथुरा ईश -धर्म और उत्थान की गाथा’ में श्रीकृष्ण को एक युग प्रवर्तक महापुरुष के रूप में प्रस्तुत करते हुए यह स्पष्ट करने का सफल प्रयास किया है कि अपने महान कार्यों के कारण किस प्रकार वे नर से नारायण बनकर भारतीय जन मानस में सर्व स्वीकार्य ईश्वर के रूप में स्थापित हुए।

एक जगह कृष्ण कह रहे हैं :‘ईश जिसे मानो उससे प्रेम करो, भयभीत न हो। ईश डरने का नहीं प्रेम करने का नाम है, इसलिए यदि मुझे ईश माना है तो मुझमें प्रेम और समर्पण रखो। अपने सारे कर्मों को मुझे समर्पित कर निश्चिंत हो जाओ, भय मुक्त हो जाओ। मैं तुम्हें तुम्हारे कर्मों का सुफल दिलवाऊंगा, तुम्हें परमात्मा तक ले जाऊंगा।‘

लेखक को श्रीकृष्ण में महान समाज सुधारक, अतुलनीय रणनीतिकार, कुशल कूटनीतिज्ञ, भारतीय संस्कृति के रक्षक और न्याय के पक्षधर का बिम्ब दिखाई देता है। लेखक ने सरल लेकिन कलात्मक भाषा शैली और देशकाल के अनुसार आधुनिक परिप्रेक्ष्य में ‘भागवत’ जैसे महाग्रन्थ में वर्णित इतिहास को अपने शब्दों में पाठकों को समझाने का प्रयास किया है।

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रोचक और अद्भुत पुस्तक है मथुरा ईश.
किताब कहती है :‘कृष्ण की विलक्षण प्रतिभा और उनके द्वारा किये गए नायकत्व से भरे अद्भुत कार्यों के कारण जनमानस ने उन्हें ही ऐसा ज्ञानी मान लिया जिसकी भक्ति कर वह परमात्मा तक पहुंच सकता है। कृष्ण की भक्ति मथुरा के आसपास प्रारंभ हुई और पूरे आर्याव्रत में फ़ैल गयी। घुमंतू मुनि नारद ने कृष्ण को विष्णु स्वरुप नारायण के रूप में स्थापित करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। कृष्ण ने भी जनमानस को ब्राह्मणों के चंगुल से निकालने और उन्हें धर्म को भय की वस्तु के स्थान पर प्रेम की वस्तु के रूप में देखने हेतु स्वयं को ईश रूप में स्थापित होने दिया।‘

श्रीकृष्ण को भगवान बनाने में भागवत कथा में जिन चमत्कारिक प्रसंगों का वर्णन काल्पनिक रूप में किया गया है, उनपर आजकल के तर्क आधारित समय में लोग विश्वास नहीं करते लेकिन इस पुस्तक में कालिया नाग मर्दन, गोवर्धन पर्वत, जयद्रथ वध में सूर्यास्त की घटना आदि को संजय त्रिपाठी ने चमत्कारिक लेकिन वैज्ञानिक और विश्वसनीय ढंग से प्रस्तुत किया है।

पुस्तक आदि से अंत तक पाठक को जोड़े रखती है और पाठक उसे पूरा पढ़कर ही मानता है। पुस्तक के वाक्य तथा संवाद सीमित तथा पूरी तरह स्पष्ट और मनोरंजक भाषा शैली में हैं जिससे पाठक पुस्तक को पढ़ता चला जाता है। हमारी प्राचीन संस्कृति और राष्ट्र भक्ति के प्रति प्रेरणा देने में लेखक इस पुस्तक में सफल हुआ है।

संजय त्रिपाठी की पहली पुस्तक 'मेरा राम, मेरा देश' भी चर्चित रही है।

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'मथुरा ईश -धर्म और उत्थान की गाथा'
लेखक : संजय त्रिपाठी
प्रकाशक : मंजुल प्रकाशन
पृष्ठ : 350
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