शुभ यात्रा : कहानियों के जरिये सड़क सुरक्षा

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'शुभ-यात्रा' सड़क सुरक्षा पर आधारित विश्व का पहला लघुकथा संग्रह है जिसमें बेस्ट सेलिंग लेखकों की कहानियां शामिल हैं.

यात्राएं जिंदगी को बदल देती हैं। यात्राएं सुरक्षित भी होनी चाहिए, क्योंकि हर जिंदगी कीमती है। सड़क सुरक्षा हर किसी के लिए महत्व रखती है। बिना सुरक्षा उपायों के सड़क पर सफर करना खतरनाक है। हर साल जाने कितने लोग सड़क दुर्घटनाओं के शिकार होते हैं या ऐसे दर्द को झेलने को विवश होते हैं जो उन्हें आजीवन सालता रहता है। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि जब भी हम वाहन चलाएं या उसमें सवार हों सड़क सुरक्षा नियमों का संजीदगी से पालन करना चाहिए। क्योंकि दुर्घटना कभी भी घट सकती है, और एक पल में किसी की जान भी जा सकती है।

'शुभ-यात्रा' सड़क सुरक्षा पर आधारित विश्व का पहला लघुकथा संग्रह है। इसका प्रकाशन मंजुल पब्लिशिंग हाउस ने किया है। यह पुस्तक 'Have a Safe Journey' का हिंदी अनुवाद है। महेंद्र नारायण सिंह यादव ने हिंदी अनुवाद किया है। पुस्तक प्राकृतिक पर्यावरण संरक्षण केंद्र, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा महेंद्रा ट्रक एंड बस डिवीजन की महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत प्रकाशित की गयी है।

सड़क सुरक्षा से जुड़ी कहानियों के इस संग्रह में बेस्ट सेलिंग लेखकों की कहानियां शामिल हैं, जिनमें आनंद नीलकंठन, अश्विन सांघी, किरण मणराल, पंकज दुबे, प्रियंका सिन्हा झा, सुमंत बत्रा, शाइनी एंटनी, तुहिन सिन्हा और विक्रम कपूर शामिल हैं। इनके अलावा हैव ए सेफ जर्नी प्रतियोगिता की कहानियां भी इस संग्रह में शामिल की गई हैं। अंबालिका, अनुकृति वर्मा, अरित्री चटर्जी, अरविंद पासी, बरनाली राय शुक्ला, दीपाली तनेजा, गीतांजलि मारिया, केतकी पटवर्धन, मीरा राजगोपालन, रत्नदीप आचार्य, रोशन राधाकृष्णन, रोशनी छाबड़ा, सहर फातिमा, संकेत चौधरी, तामरा सहगल, थॉमेन जोस, वीणा नागपाल एवं विभा लोहानी की खूबसूरत कृतियां इस संग्रह को उन्नत बनाती हैं।

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यह सभी कहानियां हमें शिक्षित करती हैं। साथ में यह भी बताती हैं कि नियमों का पालन करना कितना महत्व रखता है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा इस पुस्तक की भूमिका लिखी गई है। उन्होंने सरकार के कई महत्वपूर्ण कदमों के बारे में चर्चा की है जिनसे सड़क सुरक्षा में मदद मिलेगी। साथ में उन्होंने यह भी लिखा है कि साहित्य हमेशा ही सामाजिक बदलाव लाने का बहुत सक्षम माध्यम रहा है। यदि बच्चे सड़क सुरक्षा के बारे में कहानियां पढ़ते हुए बड़े होते हैं, तो वे सड़कों के जिम्मेदार उपयोगकर्ता बनने की दिशा में प्रोत्साहित होंगे। उन्होंने यह भी लिखा है कि सड़क सुरक्षा सप्ताह को जन आंदोलन बनाया जाना चाहिए।

महिंद्रा ग्रुप के कार्यकारी अध्यक्ष आनंद महिंद्रा का मानना है कि कहानियां अक्सर ऐसा दर्पण होती हैं, जो हमें वास्तविक जिंदगी को अधिक स्पष्ट रूप से दिखाती हैं। साथ में उन्होंने अपने विशेष संदेश में सड़क से जुड़े आंकड़े भी दिए हैं।

लेखक एवं राजनीतिज्ञ तुहिन ए. सिन्हा ने दो दशक पूर्व उनके साथ हुए एक सड़क हादसे का हवाला देते हुए कुछ समाधान एवं रणनीतियों का उल्लेख किया है।

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शुभ-यात्रा भारत में प्रकाशित होने वाला संभवत: कहानियों का ऐसा पहला संग्रह है जो सड़क-सुरक्षा पर केंद्रित है। सड़क दुर्घटनाएं बहुत भयानक होती हैं लेकिन इनकी सच्चाई से बचा नहीं जा सकता। सड़क दुर्घटनाओं पर प्रकाशित साहित्य आमतौर पर शैक्षणिक अध्ययन या तकनीकी रिपोर्ट और कभी-कभार बाल-कथाओं के रूप में ही मिलता है। इस बहुत ही गंभीर और प्रासंगिक विषय को कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत करने का यह अपनी तरह का पहला प्रयास है, जिसमें कुछ जाने-माने और कुछ उदयीमान लेखकों की कहानियां शामिल की गई हैं।
इन कहानियों की शैली एक दूसरे से काफी अलग है। कुछ में असहाय पीड़ितों की बदकिस्मती भरा रुदन सुनाई देता है तो कुछ में सख्त नैतिकता का संदेश निहित है। कुछ में उन दुर्घटनाओं का भयावह चित्रण है जिन्हें लेखकों ने देखा या कल्पना की। कुछ कहानियों में आशा और नेकी की भी झलक मिलती है। इन कहानियों का मकसद भयभीत करना नहीं, बल्कि पाठकों को झकझोरना और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरुक करना है। इसकी हर कहानी पाठकों पर प्रभाव छोड़ेगी और उन्हें सोचने तथा अमल करने के लिए भी प्रेरित करेगी।

आनंद नीलकंठन की कहानी हमें त्रसदस्यु राजा के पुत्र त्रयरुण से रूबरू कराती है जिसकी लापरवाही की वजह से एक आठ वर्षीय नेत्रहीन बालक की रथ के पहियों के नीचे कुचल कर दर्दनाक मृत्यु हो जाती है। यह कहानी हमें शिक्षा देती है कि सड़क पर किसी भी वाहन को चलाते समय खुद पर संयम और वाहन पर नियंत्रण बहुत ही आवश्यक है। यदि ऐसा करने में हम सक्षम नहीं तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

अश्विन सांघी ने अपनी कहानी में मैरी वार्ड का जिक्र किया है जो कार हादसे की पहली अभागी शिकार के रूप में इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गयी।

किरण मणराल ने देबू नामक एक लड़के के माध्यम से यह बताने की सफल कोशिश की है कि बड़ों की बातें हमारे लिए कितनी अहम होती हैं। अति उत्साह कभी-कभी किसी की जिंदगी की डोर हमेशा के लिए थाम सकता है।

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वहीं पंकज दुबे की कहानी 'कार पूल' में दो लोगों की जिंदगी बदल जाती है और उनका सफर दूसरी दिशा में मुड़ जाता है। आज के युवा वर्ग के लिए यह कहानी सीख भरी है।

कुल मिलाकर सभी कहानियां एक बात पर विशेष जोर डालती हैं और वह है कि सड़क सुरक्षा के नियम हर किसी के लिए महत्वपूर्ण हैं। दुर्घटनाएं कभी भी घट सकती हैं। पल भर में हंसती खेलती जिंदगी उजड़ सकती है। चेहरे की खुशी दुख के भंवर में बदल सकती है। और सबसे बड़ी बात -'दुर्घटना से देर भली'।

कुछ कहानियां ऐसी है जो हमें भावनात्मक रूप से प्रभावित करती हैं। जबकि कुछ कहानियां आंसू भी लाती हैं, तो कुछ नये उत्साह से हमें भर देती हैं। यह कहना बिल्कुल सही है कि जिंदगी के प्रति जागरुक होना खुद की सुरक्षा तथा दूसरों की सुरक्षा की गारंटी भी है।

आज की युवा पीढ़ी को ऐसी कहानियां जरुर पढ़नी चाहिए। यह पुस्तक स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल की जाए तो कितना अच्छा हो।

'शुभ यात्रा’
(Hindi Translation of Have A Safe Journey)
प्रकाशक : मंजुल प्रकाशन
पृष्ठ : 236

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