सामाजिक तानेबाने में पिरोई गयीं रंग-बिरंगी कहानियाँ

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क्षमा शर्मा की कहानियां हमारी अपनी हैं, क्योंकि इनके हिस्से हमारी ज़िन्दगियों के हिस्से भी हैं.

क्षमा शर्मा की कहानियां अलग-अलग रंगों से जुड़कर बनी हैं। इनमें जिंदगी के वह रंग हैं जिनके बूते वह चहल-कदमी करती है। ये कहानियां नई हैं, ये कहानियां पुरानी हैं और ये कहानियां भविष्य की चुनौतियों को भी उजागर करती हैं। यह जीवन अनगिनत संघर्षों से भरा है तथा हर कदम पर कुछ नया देखने को मिलता है। लेखिका ने जीवन की आपाधापी, विचारों का संघर्ष, प्यार, ईर्ष्या आदि विषयों पर शब्दों की बेहतरीन बुनाई की है।

'बात अभी ख़त्म नहीं हुई' क्षमा शर्मा की कहानियों का रोचक संग्रह है जिसे वाणी प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। ये कहानियां हंस, कादम्बनी, आउटलुक आदि में छप चुकी हैं।

क्षमा शर्मा की पहली कहानी 'दादी' दिल को छू जाती है। उन्होंने एक वृद्धा को केंद्र में रखकर इस कहानी को लिखा है। उसका पूरा परिवार है, लेकिन फिक्र करने वाला कोई नहीं। यह कहानी हमें बताती है कि वृद्ध उपेक्षित हैं। जब तक उनकी हड्डियों में जान है वे अपने परिवार के सदस्यों एवं समाज के लोगों के लिए कुछ ना कुछ योगदान करते हैं। उनका दिल मोम की तरह है जो भावनाओं की मामूली गर्माहट से पिघल जाता है। क्षमा शर्मा ने इस कहानी के जरिए वृद्धों की वास्तविकता को उजागर किया है। यह समाज को आईना दिखाती है। कहानी के आखिर में कहे गए संवाद सच्चाई को बयां करते हैं :''..तुम सब औरतें हो। रोज़ टीवी पर तुम्हारे अधिकारों के बारे में बताया जाता है मगर बूढ़ी होते ही मैं औरत नहीं रही।"

क्षमा शर्मा की कहानियां हमारी अपनी हैं, क्योंकि इनके हिस्से हमारी ज़िन्दगियों के हिस्से भी हैं। पात्र हमारी बोली बोलते हैं। यह हमारी कहानी है। यह कहानियां हर उस इंसान की है जो समाज में बसता है और भावनाएं रखता है।

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क्षमा शर्मा पिछले चालीस सालों से कहानियाँ लिख रही हैं। उनकी कहानियों को एक तरह से भारत में स्त्रियों की पल-पल बदलती स्थितियों के दस्तावेज़ के रूप में देखा जाता है। वह बदलती स्त्री, उसके बदले तेवर को बार-बार रेखांकित करती हैं। किसी भी विमर्श या वाद की बेड़ी से मुक्त वह स्त्रियों ही नहीं पुरुषों की समस्याओं को भी मानवीय नज़र से देखती हैं। उनका मानना है कि किसी भी एक नज़रिए की झाडू से पूरे समाज को हाँका नहीं जा सकता।
पेशे से पत्रकार क्षमा ज़िन्दगी की हर क्षण बदलती तस्वीर को किसी चित्रकार की तरह पेश करती हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित, इस पुस्तक में संकलित, उनकी ये कहानियाँ अनूठी शैली और ताज़गी से भरपूर हैं।

इस संग्रह की कहानी 'बात अभी खत्म नहीं हुई' ढेरों सवाल छोड़ जाती है। यह कहानी बेहद रोचक है। कहानी के पात्र सदानंद की अचानक मौत हो जाने के बाद एक बहुत बड़ा ट्विस्ट आता है। हालांकि हम शुरू से ही सभी पात्रों से अच्छी तरह परिचित हो जाते हैं और आनंद लेकर सभी घटनाओं को अपनी आंखों के सामने होता हुआ पाते हैं। यह एकतरफा प्यार की अधूरी दास्तान है।

यह कहानियाँ कभी न मिटने वाले कैनवस पर लिखी गई हैं। लेखिका ने ज़िन्दगी को करीब से देखा है, उसे महसूस किया है। तभी उन्होंने अपने शब्दों में एहसासों को पिरोया है जिसमें वे पूरी तरह सफल हुई हैं। महिला और पुरुष के संबंधों पर विस्तार से लिखा गया है। कहानियों को जीवन देना आसान नहीं होता क्योंकि संवाद और घटनाएँ जोड़कर कुछ अच्छा सजाया जा सकता है। क्षमा शर्मा ने आम जीवन की घटनाओं को सरलता से लिखा है। तभी ये सभी कहानियाँ हमसे दूर नहीं होतीं और हमें हर पल झंझोड़ती हैं। कहती हैं कि ज़िंदगी ऐसे भी है, वैसे भी है।

यह जरुरी नहीं कि हर सवाल का हल तुरंत निकल आये, लेकिन यह जरुर है कि बिना सवालों के ज़िन्दगी मुमकिन नहीं। जिंदगी है तो सवाल होंगे। ज़िन्दगी है तो कहानी होगी। सबसे अच्छी बात यह है कि ज़िन्दगी में रंग-बिरंगापन बेहद जरुरी है। क्षमा शर्मा की कहानियाँ जीवन के उन्हीं रंगों से बनी हैं जिनसे हमारा नाता है।

'बात अभी ख़त्म नहीं हुई
लेखिका : क्षमा शर्मा
प्रकाशक : वाणी प्रकाशन
पृष्ठ : 110

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