युवा सरोकारों की झलक ‘अवशेष प्रणय’

avashesh pranay hindi book
अलग-अलग कहानियों में लेखक राजा सिंह एक अलग विषय को उठाते हैं.
सामाजिक गतिविधियों, मानवीय सरोकारों तथा जीवन में आए उतार-चढ़ावों से जब इंसानी संवदेनाएँ आन्दोलित होती हैं, तो आदमी लेखन की ओर प्रवृत्त होता है भले ही वह किसी भी व्यवसाय अथवा जीविका क्षेत्र से जुड़ा हो। कवि, लेखक, कथाकार अथवा उपन्यासकार आदि इन्हीं व्यवस्थाओं से उत्पन्न होते हैं।

लम्बे समय तक बैंक सेवाओं से जुड़े राजा सिंह विद्यार्थी जीवन से बैंक कर्मी और अधिकारी बनने तक जीवन के उतार-चढ़ावों को महसूस कर चुके थे और अपने आसपास के वातावरण से भली-भांति परिचित भी हैं। कई घटनाओं से उन्हें इस अन्तराल में दो-चार भी होना पड़ा होगा। उनके द्वारा लिखी एक दर्जन कहानियों को राष्ट्रीय पुस्तक सदन ने ‘अवशेष प्रणय’ पुस्तक के रुप में प्रकाशित किया है। इन कहानियों को पढ़कर पता चलता है कि जैसे लेखक भी इस तरह की कथाओं का पात्र है तथा कुछ मौलिक घटनाओं में काल्पनिक सामग्री के साथ उसे कहानी का रुप प्रदान किया गया है।

कथाकार पुस्तक की भूमिका में स्वयं स्वीकार करता है कि कहानी आदिकाल से प्रचलित है। भले ही सामाजिक बदलाव के साथ उसकी भाषा-शैली और दूसरे पक्ष परिवर्तित और परिष्कृत होते गए हैं। इस कहानी संग्रह में राजा सिंह की ‘आखिरी ख़त’, 'बनवास', बेरोजगार', 'अवशेष प्रणय' और ‘उलझती ज़िन्दगी’ सहित जितनी भी कहानियाँ हैं, उन सभी के पात्र हमारे आधुनिक सामाजिक परिवेश से आए हैं तथा अलग-अलग कहानियों में लेखक एक अलग विषय को उठाता है।

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दरअसल कहानी साहित्य का एक ऐसा तत्व है जिसमें समस्या उठायी जाती है लेकिन उसके समाधान तक वह नहीं चलती। इन कथाओं में लेखक जीवन के कई रंगों को अपनी शैली में प्रस्तुत करता है। प्रेम, वैमनस्य, वाद-विवाद, करुणा, जुड़ाव-अलगाव, मानवीय जीवन की भाग-दौ़ड़, अंतर्द्वंद आदि के भाव सभी कहानियों में भिन्न प्रकार से परिलक्षित हैं।

लेखक राजा सिंह ने जिन्दगी की बातों को हमारे सामने रखा है। ज़िन्दगी के उस ख्याल को पन्नों में उतार दिया है जिससे हम जुड़े हुए हैं। लेखक समाज की बात करते हैं, भावनाओं की बात करते हैं, और बात करते हैं उस जुड़ाव की जिससे समाज के अलग-अलग रेशे जुड़कर एक बेहतरीन रचना को जन्म देते हैं। हालांकि उस रचना में कई तरह की खरोचें समय और परिस्थितियों के साथ आती रहती हैं, मगर तानाबाना इस तरह है कि अलगाव नहीं हो पाता। कुछ धागे करीब से, कुछ दूर से जुड़े रहते हैं।

दहेज तथा नारी उत्पीड़न जैसी समस्याओं को भी लेखक ने उठाया है। ‘बुत का दहन’ इसी तरह के सामाजिक कलंक की हकीकत बयान करती कहानी है। सभी कहानियाँ हमारे सामाजिक सरोकारों की दास्तान हैं। उनमें कई खट्टी-मीठी मनोरंजक घटनाओं को करीने से कहानियों में पिरोने में लेखक सफल रहा है। हमारी युवा पीढ़ी के लिए यह कथा संग्रह पठनीय है। कह सकते हैं कि हमारी युवा पीढ़ी के लिए ‘अवशेष प्रणय’ एक ऐसा आईना है जिसमें उसका प्रतिबिम्ब झलकता है।

"अवशेष प्रणय"
लेखक : राजा सिंह
प्रकाशक : राष्ट्रीय पुस्तक सदन
पृष्ठ : 128

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