मलयालम की लोकप्रिय कहानियाँ हिन्दी में

malayalam ki lokpriya kahaniyan
किताब में हिन्दी अनुवाद इन कहानियों की मौलिकता को बनाए रखता है.
दक्षिण भारतीय फिल्मों को हिन्दी में डब करने के बाद जिस तरह उनकी लोकप्रियता हिन्दी भाषी दर्शकों के बीच बढ़ी है, उसी तरह मलयालम कथाकारों की कहानियों का हिन्दी अनुवाद हिन्दी पाठकों में लोकप्रियता को प्राप्त हो तो कोई आश्चर्य नहीं। मलयालम के श्रेष्ठ कथाकारों की लोकप्रिय तथा श्रेष्ठ कहानियाें के हिन्दी अनुवाद का संग्रह 'मलयालम की लोकप्रिय कहानियाँ’ शीर्षक से पुस्तक के रुप में प्रभात प्रकाशन ने प्रकाशित कर हिन्दी पाठकों को उपलब्ध कराने का प्रशंसनीय कार्य किया है।

पुस्तक में संकलित कहानियों में मलयालम से हिन्दी में अनुवाद का काम सम्पादक एस. तंकमणि अम्मा के पिता स्व. प्रो. आर. जर्नादन पिल्लै, पी.के. राधामणि तथा सुमित पी.वे. ने किया है। ये सभी मलयालम तथा हिन्दी के विद्वान हैं जिन्हें दोनों भाषाओं के साहित्य में उच्च कोटि का ज्ञान और लम्बा अनुभव है।

पुस्तक में मलयालम की जिन 18 कहानियों का संकलन है वे सभी मलयालम कथा साहित्य के उत्कृष्ट विद्वान तथा मानवीय सरोकारों के गंभीर अध्येताओं द्वारा लिखी गई हैं। कहानी कला की तमाम विशेषताओं के साथ इन कहानियों में सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और आधुनिकता के प्रभाव की स्पष्ट छाप मिलती है।

malayalam ki kahaniyan
मलयालम साहित्य की सर्वाधिक सशक्त, समृद्ध एवं श्रेष्ठ विधा के रुप में स्वीकृति प्राप्त कहानी विधा की प्रतिनिधि एवं लोकप्रिय कहानियों का यह संकलन पठनीयता तथा रोचकता से भरपूर है। इसमें संकलित कहानियाँ मलयालम कहानी के क्रमिक विकास तथा उस विकास यात्रा के दौरान संवेदना और संरचना के क्षेत्र में आए बदलावों को स्पष्ट रेखांकित करने वाली हैं। मलयालम की लोकप्रिय कहानियों का यह हिन्दी अनुवाद संकलन एक ओर भारतीय भाषाओं में विरचित कहानी साहित्य के तुलनात्मक अध्ययन को बढ़ावा देगा तो दूसरी ओर मलयालम कहानियों के अनुवाद को अन्यान्य भाषाओं के लिए सुगम भी बना देगा। भारतीय साहित्य तथा तुलनात्मक साहित्य के अध्येताओं व शोधार्थियों के लिए यह संकलन सर्वथा उपयोगी सिद्ध होगा।

'बाढ़ में’ शीर्षक से संकलित कहानी में लेखक तकषि शिव शंकर पिल्लै ने मानव और पशु की वफादारी को जबर्दस्त ढंग से पेश किया है। हालांकि यह कहानी दुखांत है लेकिन इसमें एक कुत्ते की स्वामिभक्ति का रेखांकन पाठक को झकझोर कर रख देता है और वह स्वयं कहानी के पात्रों के बीच खुद को भी मौजूद पाता है।

इसी कहानी के साथ कारुर नीलकंठ पिल्लै की 'कठपुतलियाँ’, ललितांबिकर अंतर्जनम् की 'धीरेंदु मजूमदार की माँ’, वैक्कम मुहम्मद बशीर की 'जन्मदिन’, एस.के. पोट्टेक्काट्ट की 'कुँवारों की माँद’ आदि सभी कहानियाँ एक से बढ़कर एक हैं जो मनोरंजन के साथ कई तरह के संदेश भी देती हैं।

हिन्दी अनुवाद इन कहानियों की मौलिक भाषा-शैली को बनाए रखता है। हिन्दी भाषी समुदाय को मलयाली कथा साहित्य का रसास्वादन कराने के लिए एस. तंकमणि अम्मा का यह प्रशंसनीय प्रयास है।

"मलयालम की लोकप्रिय कहानियाँ"
संपादक : एस. तंकमणि अम्मा
प्रकाशक : प्रभात प्रकाशन
पृष्ठ : 176

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