2018 की ख़ास किताबें

best books of 2018 in hindi
ऐसी कई किताबें जिन्हें आप अपनी अलमारी से हटाना नहीं चाहेंगे.
2018 में हिन्दी में बेहतरीन किताबें आयीं। समय पत्रिका लाया है ऐसी ही अच्छी किताबों की सूची -

sapiens book in hindi

सेपियन्स :
इस पुस्तक में लेखक ने साधारण वानरों से लेकर विश्व के शासकों तक के हमारे असाधारण इतिहास और तत् सम्बन्धी अनेक प्रश्नों पर गंभीरता से अनुसंधान कर विचार प्रस्तुत किए हैं। मानव जाति का संक्षिप्त इतिहास 450 पृष्ठों की एक पुस्तक में दर्ज करते हुए मानव के आदिम जीवन से लेकर आधुनिक युग तक के उत्थान-पतन पर विस्तार से चर्चा की गयी है तथा कई गंभीर मुद्दों पर सवाल उठाए गये हैं। लेखक ने ऐतिहासिक घटनाक्रम के अध्ययन से यह निष्कर्ष निकालने की कोशिश की है कि आगामी सहस्राब्दियों में हमारी दुनिया कैसी होगा?

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hindu book by shashi tharoor

मैं हिन्दू क्यों हूँ :
डॉ. शशि थरुर की यह पुस्तक बहुत ही महत्वपूर्ण दस्तावेज है। किताब के अनुवादक युगांक धीर कहते हैं कि स्वाधीन भारत में एक मार्गदर्शक हिन्दू ग्रन्थ की बहुत बड़ी कमी पूरी हो गयी है। यह पुस्तक हिन्दू धर्म के सभी पहलुओं को छूती है। हिन्दू होने के मतलब को स्पष्ट करती है। लेखक स्वयं बताते हैं कि उन्होंने इतिहासकारों, धर्मशास्त्रियों और समाजशास्त्रियों के सैद्धान्तिक दृष्टिकोण की बजाय हिन्दूवाद के प्राचीन ग्रन्थों और हिन्दुत्व की आधुनिक मान्यताओं, दोनों का ही उनके अपने शब्दों में वर्णन प्रस्तुत किया है। पाठकों को दुनिया के प्राचीनतम और महानतम धर्म और इसके समकालीन अस्तित्व का एक स्पष्ट, सजीव और विचारशील वृत्तान्त पढ़ने को मिल सकेगा।

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chool lo asman hindi

छू लो आसमान :
रश्मि बंसल की यह किताब नहीं पढ़ी, तो क्या पढ़ा। इस किताब में महिलाओं की प्रेरणादायक कहानियां हैं जो ज़िन्दगी की सीख दे रही हैं। ताकि कुछ बेहतर हो, कुछ ख़ास हो, कुछ ऐसा जो भविष्य को उज्ज्वल कर दे।
 लेखिका कहती हैं कि अपनी ज़िन्दगी की कमान सँभालकर, अपनी ताकत को आजमाइए। आप हालात, समाज या किसी दूसरे बाहरी तत्व की शिकार नहीं। वहीं जुनूनी, सकारात्मक और ताकतवर महिला बनिए जिसके लिए आपने जन्म लिया है।

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manto book rajkamal prakashan

मंटो :
इस पुस्तक में मंटो की पन्द्रह कहानियाँ संकलित हैं जिनका चयन नंदिता दास ने किया है. 'टोबा टेक सिंह', 'ठंडा गोश्त', आदि कहानियाँ ज़िन्दगी की हक़ीक़त को बयान करती हैं. नंदिता दास के शब्दों में -'मंटो की कहानियाँ सत्य और कल्पना के बीच की लाइन को तो धुँधला कर देती हैं लेकिन उनके लेख बिल्कुल साफ़ होते हैं. वे जितना औरों के बारे में बताते हैं, उतना ही अपने बारे में.'

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andhkar kal book hindi

अन्धकार काल :
शशि थरुर की इस किताब ने इतिहास को हमारे सामने फिर से जीवित कर दिया। उन्होंने युवाओं के लिए उसे समझने का एक शानदार जरिया उपलब्ध कराया है। हम कई ऐसे तथ्यों को नकार नहीं सकते जिनके विषय में हमारे पास भ्रमित जानकारियां थीं या अन्य कारण रहे हों। गुलामी की जंजीरों में जकड़े होने की वजह से देशवासी अंदर ही अंदर उबल रहे थे। इस वजह से विद्रोह होते रहे, लेकिन उन्हें दबाया जाता रहा। हम अपनी आंखों के सामने अपने देश को लुटता हुआ देख रहे थे। यह बेहद दुख की बात है।

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ग्यारहवीं-A के लड़के

ग्यारहवीं-A के लड़के :
गौरव सोलंकी ने ज़िन्दगी के स्याह किस्सों को मासूमियत के साथ बताया है। ये वे बातें हैं जो होती हैं, हर समय कहीं न कहीं घटती हैं, किसी न किसी की ज़िन्दगी को तोड़-मरोड़कर रख देती हैं।
गौरव सोलंकी वह लड़का है जो कभी न खत्म होने वाली कहानियाँ लिखता है। मोड़ आयेंगे, फिर कुछ ऐसा घटेगा जो दिलचस्पी जगाएगा। शिद्दत से कहानियों में जीने वाला इंसान, कहानी कहता हुआ अपना-सा लगता है। गौरव हिन्दी में नयी चमकदार कोंपल की तरह हैं। उनकी कहानियों का अंदाज़ इतना अलग है कि अच्छे-अच्छों को गंभीर कर दे। सवाल खुद से पूछने बैठ जाए कोई। मुस्कान इतनी लंबी खिंचे कि खिंचती जाए। अलग शैली जो भावों को नई जमीन तलाश करने में मदद करने लगे। ज़िन्दगी की वास्तविक पहेलियाँ जिनका हल तो हमारे आसपास है।

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hit refresh book in hindi

हिट रिफ्रेश :
माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला की पुस्तक ‘हिट रिफ्रेश’ तकनीक से होने वाले हमारे जीवन में बदलाव पर आधारित है। F-5 बटन से रिफ्रेश किया जा सकता है। यह पुस्तक बताती है कि माइक्रोसॉफ्ट में परिवर्तन हो रहा है। लेखक ने अपने जीवन के अच्छे और खराब अनुभवों को यहाँ साझा किया है। तकनीक से जिन्दगी को संवारने में वे और उनकी टीम जुटी हुई है। अपने बचपन की सत्य नडेला ने चर्चा की है। वहीं अपने अपंग बेटे के बारे में भी लिखा है। प्रभात रंजन ने बहुत ही शानदार अनुवाद किया है।  सत्य नडेला ने संवेदनाओं पर एक दार्शनिक की तरह चर्चा करने की कोशिश की है। वे कहते हैं कि विचार जोश भरते हैं, संवेदना उन्हें संतुलित करती है। उनका मानना है कि नई उर्जा और नए विचारों की खोज में और अपने आप को निरंतर प्रासंगिक बनाये रखने के लिए उन्हें ‘रिफ्रेश’ बटन दबाते रहना चाहिए।

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मौन मुस्कान की मार

मौन मुस्कान की मार :
अभिनेता आशुतोष राणा की यह किताब हमें उनके चुटीले अंदाज़ से प्रभावित करती है। उनके व्यंग्य समाज को नयी सोच से रुबरु कराते हैं। उन भावनाओं को जाग्रत करते हैं जो अभी तक सोयी हुई हैं। हिन्दी प्रकोष्ठ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुरेश आचार्य कहते हैं कि आशुतोष की सूक्ष्म निरीक्षण शक्ति ने सचमुच कमाल किया है, जैसे कोई फीचर चल रहा हो। वे समय, समाज, संदर्भ और व्यक्तित्व की ऐसी सबल संरचना करते हैं कि रचना बोलने लगती है। व्यंग्य का मूल स्वर लिए ये रचनायें लेखक के द्वारा विधिवत देखे गए, भोगे गए समय और समझे गए चरित्रों पर आधारित हैं।

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द विंची कोड :

द विंची कोड :
डैन ब्राउन की इस पुस्तक को दुनिया में बेहताशा शोहरत मिली है। इसे विश्व के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले उपन्यासों में गिना जाता है। पुस्तक कई बरस पहले अंग्रेजी में आयी थी। खूब धमाल किया, और विवाद भी हुए। कुछ समुदायों को इससे नाराज़गी महसूस हुई। उन्होंने विरोध भी किया। लेकिन लेखक का दावा है कि उन्होंने तथ्यों के आधार पर इस उपन्यास की रचना की है। एक के बाद एक रोमांचक घटनाओं से पाठक जुड़ा हुआ महसूस करता है। पहेलियाँ उलझा जरूर देती हैं, मगर उनके करीब पहुँचकर थोड़ी राहत मिलती है, और हर मौके पर दिल की धड़कनें तेज़ भी हो जाती हैं। रहस्य जिसे दफन कर दिया गया था, उसकी खोज ही इस किताब की जान है।

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बॉम्बे बार

बॉम्बे बार :
प्रसिद्ध खोजी पत्रकार विवेक अग्रवाल ने मुम्बई की बारबालाओं के जीवन की धूप-छांह भरी ज़िन्दगी की वास्तविक तस्वीर को समाज के सामने रखने की ईमानदार कोशिश की। इस पुस्तक को खूब सराहा गया। पुस्तक पढ़कर पता चलता है कि बारबालाओं के उत्तेजक नाच का क्या मतलब है? उनके नितम्बों से वक्ष तक जो उभार हैं, उनके बेहया प्रदर्शन का क्या अर्थ है? मुम्बई की बारबालाओं के हर रंग, हर रुप और हर खेल की पूरी पड़ताल को लेखक इस पुस्तक में बहुत ही मौलिक, स्वतंत्र, ईमानदार, कारुणिक तथा दिलचस्प भाषा शैली में पाठकों के सामने रखा है।

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सलाखों के पीछे

सलाखों के पीछे :
टीवी पत्रकार सुनेत्रा चौधरी ने एक ऐसा दस्तावेज तैयार किया है जिसे संग्रह कर रखा जा सकता है। यह एक जरुरी किताब की तरह हो गयी है जिसे पढ़ना सलाखों के पीछे की ज़िंदगी को महसूस करना है। जेल की दीवारों के बीच बसी दुनिया की दर्दनाक दास्तानों की हकीकत को बयान करने वाली किताब है ‘सलाखों के पीछे’।

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अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार

अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार :
कुल नौ कहानियों का यह संग्रह अपने आप में स्त्री-पुरुष संबंधों की जटिल सच्चाइयों को समेटे हुए है। ये फँतासियों और नाटकीयता से बहुत दूर अवसाद और कुंठाओं की सहज कहानियाँ हैं। यहाँ आपको पारंपरिक वर्जनाओं और उनसे उपजे अंतर्द्वंद से जूझते ऐसे बहुत से किरदार मिलेंगे जिन पर बंधनों को तोड़ देने का फ़ितूर है और उन्हें तोड़ देने का मलाल भी।

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mulk book in hindi

मुल्क :
अनुभव सिन्हा की फिल्म 'मुल्क’ की पटकथा को राजकमल प्रकाशन समूह ने एक सफल प्रयोग के तौर पर प्रस्तुत किया है। यही वजह है कि प्रकाशक कुछ अन्य पटकथाओं पर भी काम कर रहे हैं ताकि उन्हें भी किताब के रुप में लाया जा सके। पहली बात जो सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है कि यह किताब एक उम्मीद जगाती है। समाज के लिए आईना है। 'मुल्क’ के असली मायने समझाती है। ज़िन्दगी हर किसी की कीमती है। एक जगह देखें -'एक मुल्क काग़ज़ पर नक्शों की लकीरों से नहीं बँटता सर, मुल्क बँटता है दिमाग़ में, रंग से, भाषा से, धर्म से और जात से।'

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घाचर-घोचर

घाचर-घोचर :
‘घाचर-घोचर’ शब्द के अर्थ की जिज्ञासा पाठक को उपन्यास पढ़ने को बाध्य करती है। कुछ पृष्ठों को पढ़ने के बाद ही पाठक को इस शब्द का साक्षात्कार होता है लेकिन लेखन-शैली और रोचक भाषा का माधुर्य उसे पूरी पुस्तक पढ़ने को प्रेरित प्रेरित करता है। इस उपन्यास में बेंगलूरु जीवन-शैली की संवेदनशीलता, स्पष्ट छाप छोड़ती हुई चलती है। विवेक शानभाग की पुस्तक दुनिया भर में चर्चा का विषय रही है। साल 2017 में ‘घाचर-घोचर’ न्यूयॉर्क टाइम्स और द गार्डियन द्वारा सर्वश्रेष्ठ दस पुस्तकों में शामिल किया गया है। यह उपन्यास विश्व की 18 भाषाओं में अनूदित है।

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न बैरी न कोई बेगाना

न बैरी न कोई बेगाना :
सुरेन्द्र मोहन पाठक की जीवनी है यह किताब जिसमें उनके जीवन के अनछुए पहलुओं को करीब से जानने का मौका मिलेगा. हम यह भी जानेंगे कि विभाजन के समय उनका परिवार दिल्ली किन हालात में रहा. क्यों रिफ्यूजी कैम्प में उन्हें रहना पड़ा? उनका बचपन और किशोरावस्था किस तरह गुज़री? ऐसे तमाम सवाल हमें उनकी इस पुस्तक में पढ़ने को मिलेंगे. अभी तक हम उनके आपराधिक कहानियों से रचे-बसे संसार को पढ़ते आये हैं. पहली बार उनकी खुद की कहानी एक किताब की शक्ल में वैस्टलैंड ने प्रकाशित की है. तीन भागों की आत्मकथा का पहला हिस्सा है. इस किताब में उनके बचपन और जवानी की रोचक बातें हैं.

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इंडियापा

इंडियापा :
यहां प्रेम है, वियोग है, हंसी है, खुशी है, रोमांच है, और वह सबकुछ जिसे आज का पाठक पढ़ने की इच्छा रखता है। सबसे बड़ी बात यहां अपना इंडिया है। पढ़कर बहुत सूकून मिलता है जब विनोद दूबे बनारस के घाटों का सजीव वर्णन करते हैं। यह किताब किसी सफर से कम नहीं है, तमाम उतार चढ़ाव और तूफानों से जूझते ऐसे कपल की स्टोरी है जो आपके इर्द गिर्द होते हैं लेकिन वो अपनी बातें ख़ुद तक रखते हैं।

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आपकमाई

आपकमाई :
स्वानंद किरकिरे फिल्मों में गीत लिखते हैं। वे गायक, अभिनेता, संवाद लेखक, संगीत-निर्देशक भी हैं। ‘आपकमाई’ उनका पहला कविता संग्रह है। पुस्तक की भूमिका में स्वानंद किरकिरे लिखते हैं : ‘शब्द, लय, संगीत मुझे विरासत में मिले हैं। ये मेरी बापकमाई हैं। पर मेरे जो विचार हैं वो मेरी ‘आपकमाई’ हैं।’ ‘आपकमाई’ में उनकी वो कविताएं भी पढ़ने को मिलेंगी जो बाद में फिल्मों के मशहूर गीत बनीं। ये कविताएं आपकी बोली बोलती हैं। हमें ज़िन्दगी की हवाओं के असर से वाकिफ कराती हैं। स्वानंद किरकिरे का पहला कविता-संग्रह एक बार जरुर पढ़ना चाहिए।

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वजूद और परछाईं

वजूद और परछाईं :
फिल्मी दुनिया के अनगिनत रंगों को दिलीप कुमार की आत्मकथा में देखा जा सकता है। एक कलाकार की नज़र से उन हलचलों को जानना और समझना आसान होगा जिसे बाहर से जाना नहीं जा सकता। ट्रेजडी किंग के नाम से मशहूर हुए इस अभिनेता की यह किताब हर किसी को संतुष्ट करती है। किताब में फिल्म जगत की नामी हस्तियों ने दिलीप साहब के बारे में अपनी राय रखी है। यश चोपड़ा, धर्मेन्द्र, अमिताभ बच्चन, मनोज कुमार, हेमा मालिनी, आमिर खान आदि के संस्मरण पढ़ने लायक हैं। ज़िन्दगी के खट्टे-मीठे किस्सों से सजी दिलीप कुमार की यह किताब एक प्रेरणादायक दास्तान है जिसे बार-बार उसी उत्साह के साथ पढ़ा जा सकता है।

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चौरासी

चौरासी :
सत्य व्यास जो भी लिखते हैं बहुत तेज़ी से चर्चित हो जाता है। चाहें 'बनारस टॉकीज़' हो या 'दिल्ली दरबार', पाठक उन्हें दिलचस्पी लेकर पढ़ते हैं। ‘चौरासी’ नामक यह उपन्यास सन 1984 के सिख दंगों से प्रभावित एक प्रेम कहानी है। यह कथा नायक ऋषि के एक सिख परिवार को दंगों से बचाते हुए स्वयं दंगाई हो जाने की कहानी है। यह अमानवीय मूल्यों पर मानवीय मूल्यों के विजय की कहानी है। यह टूटती परिस्थितियों मे भी प्रेम के जीवित रहने की कहानी है। यह उस शहर की व्यथा भी है जो दंगों के कारण विस्थापन का दर्द सीने में लिए रहती है। यह वक़्त का एक दस्तावेज़ है।

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रसराज पंडित जसराज

रसराज पंडित जसराज :
सुनीता बुद्धिराजा ने पंडित जसराज की जीवनी लिखी है जिसे तैयार करने में उन्हें कई साल लगे। इस किताब में जसराज जी के जीवन की ऐसी बातें दर्ज हैं जिन्हें काम ही लोग जानते हैं या शायद अभी तक उनका खुलासा हुआ ही नहीं। यह किताब आपको ऐसी जीवन यात्रा पर ले जाती है जहाँ आप सुर-लय-ताल के साथ दिलचस्प सैर करते हैं।

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मन के मंजीरे

मन के मंजीरे :
इस किताब में रचना भोला ‘यामिनी’ ने प्रेम की नयी परिभाषाएँ प्रस्तुत की हैं। ‘रूहानी इश्क की इबादत में रचे लव नोट्स’ बेहद खूबसूरत हैं। उनके पास प्रेम की छीटों का कैनवास है जिसपर वे बेहतरीन चित्र उकेरती हैं। उत्सुक करतीं, उकसाती बातें, मन की मछली इठलाती, इतराती हुई तरंगों के साथ दौड़ जाती है मन में। वे विश्वास दिलाती हैं कि इंद्रधनुष के रंग हर तरफ बिखरे हैं, जाओ उन्हें समेट लाओ, और खुद को उनमें सराबोर कर लो। उनके जायकेदार ‘लव नोट्स’ ज़िन्दगी की हसरतों को जगाते हैं। रचना जी ने ढेरों बेस्टसैलेर किताबों के शानदार अनुवाद भी किये हैं। प्रेम में लिपटी उनकी मखमली कविताओं की पुस्तक ‘मन के मंजीरे’ एक खास किताब है।

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वापसी इम्पॉसिबल

वापसी इम्पॉसिबल :
सुरभि सिंघल की जब पहली किताब 'फ़ीवर 104° F' तो वे छा गयीं। उनकी चर्चा हर जगह हुई। एक छोटे से शहर से आने वाली सुरभि की भाषा और कहने का अंदाज़ अलग है। 'वापसी इम्पॉसिबल' में भी उन्होंने अपना जादू बरकरार रखा है। इस साल आयी ख़ास किताबों में सुरभि की यह किताब जरूर पढ़ी जानी चाहिए।

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टीम लोकतंत्र

टीम लोकतंत्र :
यकीनन यह भारतीय क्रिकेट की शानदार कहानी है। राजदीप सरदेसाई 11 भारतीय क्रिकेट खिलाड़ियों के माध्यम से स्वाधीनता के बाद के भारतीय क्रिकेट की कहानी हम सभी के सामने लेकर आये हैं। इन खिलाड़ियों में 60 के दशक से दिलीप सरदेसाई से लेकर महेन्द्र सिंह धोनी और विराट कोहली तक शामिल हैं। ये किताब 11 सबसे अच्छे भारतीय क्रिकेटर्स के बारे में नहीं है। ये किताब व्यक्तिगत हवालों से आये हुए किस्सों और कहानियों के दम पर भारतीय क्रिकेट की यात्रा के बारे में बात करती है।

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मेरी हनुमान चालीसा

मेरी हनुमान चालीसा :
‘मेरी हनुमान चालीसा’ में देवदत्त पटनायक ने हनुमान चालीसा के छंदों का विस्तारपूर्ण वर्णन किया है। यह पुस्तक हमें हनुमान के जरिये जीवन जीने के नये नजरिये से मुखातिब कराती है। समझाती है कि हनुमान तारणहार हैं और राम के लिए हनुमान जरुरी क्यों हैं?
 ‘मेरी हनुमान चालीसा’ पुस्तक में लेखक देवदत्त पटनायक ने हनुमान के बारे में प्रचलित धारणाओं को हनुमान चालीसा के माध्यम से समझाने का सफल प्रयास किया है। उन्होंने रामभक्त हनुमान की कीर्ति पर लिखी इस प्रार्थना को केवल प्रार्थना तक सीमित न रखते हुए हनुमान के आध्यात्मिक रुप से जुड़ी तमाम कथाओं के बारे में उनके महात्म्य और महत्व पर अपनी मौलिक लेखन शैली का प्रयोग किया है।

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देवलोक -3

देवलोक -3 :
देवदत्त पट्टनायक की यह किताब रामायण के विविध संस्करणों के बारे में विस्तार से चर्चा करती है। बौद्ध धर्म व जैन धर्म के बारे में सूचनापरक प्रसंगों के साथ उनका आकर्षक इतिहास भी यहां पढ़ने को मिलता है। देवदत्त ने इस पुस्तक में हिन्दू धर्म के अनेक रीति-रिवाज़ों के पीछे की रोचक कहानियों का वर्णन किया है। यह किताब पन्द्रह से ज्यादा सूचनाप्रद तथा प्रेरक प्रसंगों के साथ शिक्षा व मनोरंजन का अद्भुत मेल है जिसे बहुत ही सरल और सहज तरीके से देवदत्त पट्टनायक ने बताया है।

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इंदिरा

इंदिरा :
सागरिका घोष ने इंदिरा गॉंधी के जीवनीपरक व्यक्तित्व और इंदिरा के स्त्रीरुपी तथा नेता के रुप में पत्रकारीय आकलन करते हुए उनका इतिहास लेखबद्ध किया है। इस पुस्तक में लेखिका ने वर्तमान भारतीय राजनीति में कुनबापरस्ती, लोकतंत्र, धार्मिक कलह, तानाशाह नेतृत्व और लैंगिक समीकरणों से जुड़े सवालों की तुलना इंदिरा गांधी के कार्यकाल से करते हुए जबाव की तलाश की कोशिश की है। इनका जबाव मौजूदा परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिक हो गया है।

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भारतीय सेना के शूरवीरों की शौर्यगाथाएँ

भारतीय सेना के शूरवीरों की शौर्यगाथाएँ :
भारत के सैन्य बलों की सच्ची वीरता की कहानियाँ समेटे हुए यह पुस्तक 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक का हाल भी बताती है। लेखक शिव अरुर को भारतीय सेना और उसके संघर्षों से जुड़ी घटनाओं की कवरेज करने का एक दशक से अधिक का अनुभव है।

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ताकत वतन की हमसे है :
रचना बिष्ट रावत की यह किताब हमें बताती है कि सेना के अधिकारी वास्तव में करते क्या हैं। यहां 21 सैन्य अधिकारियों के जीवन की वास्तविक कहानियाँ हैं। हर किसी के पास दिलचस्प कहानी है। अनकहे किस्से जिन्हें बार-बार पढ़ने का मन करता है। किताब की भूमिका एम.एस. धोनी ने लिखी है।

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युद्ध में अयोध्या :
वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा ने अयोध्या के इतिहास, सियासत आदि पर चर्चा की है। यह किताब मौजूदा परिप्रेक्ष्य में बहुत अहम जाती है। अयोध्या का मतलब है, जिसे शत्रु जीत न सके। मनुष्य उसी से युद्ध करता है, जिससे जीतने की संभावना रहती है। यानी अयोध्या के मायने हैं, जिसे जीता न जा सके।

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मदारीपुर जंक्शन

मदारीपुर जंक्शन :
बालेन्दु द्विवेदी का यह पहला उपन्यास है, लेकिन इस उपन्यास को पढ़ने से ऐसा लगता है जैसे यह किसी मंजे हुए उपन्यासकार की कृति है। पाठक लेखन शैली, भाषायी मनोरंजन और कहानी की निरंतरता के बीच इतना घुल-मिल जाता है कि वह उपन्यास को शुरु कर उसके समापन पर ही उसका पीछा छोड़ता है। पूरी कथा एक भी स्थान पर जरा भी बोर नहीं करती बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश की ग्रामीण संस्कृति में शामिल वर्ग भेद को बहुत ही मौलिक लेकिन मनोरंजक ढंग से प्रदर्शित करते हुए आगे बढ़ती है।

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ज़िन्दगी 50-50

ज़िन्दगी 50-50 :
युवा लेखक भगवंत अनमोल की यह किताब बेहद चर्चित रही। इस किताब ने लोगों को प्रेरित किया, उनकी सोच को बदला। किन्नर समुदाय के लोगों की भावनाएँ, ज़रूरतें, महत्वाकांक्षायें और उनकी समस्याओं आदि को अगर क़रीब से जानना हो, उन्हें महसूस करना हो, तो ज़िन्दगी 50-50 ज़रूर पढ़नी चाहिए। यह मात्र एक किताब ही नहीं अपितु एक वर्ग विशेष के जीवन का वो सच है जिसे समाज के हर सामान्य व्यक्ति को अवश्य जानना चाहिए।

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मेरी फितरत है मस्ताना

मेरी फितरत है मस्ताना :
मनोज ‘मुंतशिर' की यह पहली किताब रिलीज़ के चौबीस घंटे में ही बेस्टसैलर हो गयी। 'तेरे संग यारा', 'मेरे रश्के-क़मर', 'मैं फिर भी तुमको चाहूँगा' जैसे दर्ज़नों लोकप्रिय गीत लिखने वाले मनोज ‘मुंतशिर', फिल्मों में शायरी और साहित्य की अलख जगाए रखने वाले चुनिंदा क़लमकारों में से एक हैं। 'मेरी फितरत है मस्ताना' उनकी अन्दरूनी आवाज़ है। जो कुछ वो फ़िल्मों में नहीं लिख पाये, वो सब उनके पहले कविता संकलन में हाज़िर है।

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देवदारों के साये में

देवदारों के साये में :
रस्किन बॉण्ड जब कोई किस्सा सुनाते हैं, वह ख़ास हो जाता है. वे कहानी कला को जानते हैं. लंबे समय से किस्सों और कहानियों में जीते आ रहे बॉण्ड को पढ़ना हर बार सुखद होता है. वे जिंदादिली के साथ लिखते हैं. इसलिए उनकी हर कहानी बेजोड़ हो जाती है. हर कहानी में रस पड़ जाता है, और सबसे बड़ी बात कि उनकी कहानियाँ रोमांच का शानदार संगम होती हैं. आप उन्हें बार-बार पढ़ना चाहेंगे. ‘देवदारों के साये में : 8 बेहतरीन नई कहानियाँ’ चर्चित लेखक रस्किन बॉण्ड की हत्या और अपराध की दिलचस्प कहानियों का संग्रह है. हर कहानी अपने में बेजोड़ है.

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आज के आईने में राष्ट्रवाद

आज के आईने में राष्ट्रवाद >>
यह पुस्तक प्रगतिशील सोच को विस्तार देती है और कुंठित मानसिकताओं को धराशायी करने वाले विचारों का स्वागत करती है। ‘आज के आईने में राष्ट्रवाद’ रविकांत द्वारा सम्पादित पुस्तक में जेएनयू के विद्वान प्रोफेसरों तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े बुद्धिजीवियों के पन्द्रह लेखों का संग्रह है। यह पुस्तक देश के सत्तातंत्र और उसके वैचारिक पथप्रदर्शक आरएसएस के संकीर्ण राष्ट्रवाद के कारण देश में पनप रहे नफरत और हिंसा से मुकाबिल एक रचनात्मक प्रतिशोध है। इसमें अनिल सदगोपाल, अनुराग मोदी, अपूर्वानन्द, अशोक वाजपेयी, आनन्द कुमार, गोपाल प्रधान, तनिका सरकार, निवेदिता मेनन, पी. साईंनाथ, प्रभात पटनायक, पुरुषोत्तम अग्रवाल, बद्री नारायण, योगेन्द्र यादव, वीर भारत तलवार, सतीश देशपांडे जैसे बुद्धिजीवियों के राष्ट्रवाद पर बहुमूल्य विचार हैं।

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गुप्त भारत की खोज

गुप्त भारत की खोज :
पॉल ब्रन्टन की पुस्तक ‘गुप्त भारत की खोज’ हमें ऐसी आध्यात्मिक और रोमांचक यात्रा पर ले जाती है जहां एक विदेशी पवित्र भारत की खोज में निकला हुआ है। यह पुस्तक हमें आध्यात्मिक यात्रा पर ले जाती है। ऐसी यात्रा जो बिल्कुल अलग तरह की है। कुछ राज भी खोलती चलती है यह किताब जिन्हें हिन्दुस्तानी नजरअंदाज करते हैं या फिर वे उन्हें उतना जरुरी नहीं समझते।

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