विजय तेंडुलकर के नाटक : वे मुद्दे जिनका हमसे सरोकार है

vijat tendulkar ke natak
तेंडुलकर को पढ़ना बहुत शानदार अनुभव है. पात्र हर किसी के जाने-पहचाने-समझे पात्र हैं.
विजय तेंडुलकर ने करीब तीस नाटकों तथा दो दर्जन एकांकियों की रचना की है, जिनमें से अनेक आधुनिक भारतीय रंगमंच की क्लासिक कृतियों के रूप में शुमार होते हैं। वाणी प्रकाशन ने उनके नाटकों को प्रकाशित किया है।

विजय तेंडुलकर को पढ़ना बहुत शानदार अनुभव है। उनके पात्र हर किसी के जाने-पहचाने-समझे पात्र हैं, क्योंकि विजय जी समाज के उन मुद्दों को बेबाकी से प्रस्तुत करते हैं जिनसे हमारा सरोकार है।

विजय तेंडुलकर मूलतः मराठी के साहित्यकार हैं जिनका जन्म 7 जनवरी 1928 को हुआ. 19 मई 2008 को उनका अवसान हुआ। विजय तेंडुलकर ने लगभग 30 नाटकों तथा दो दर्जन एकांकियों की रचना की, जिनमें से अनेक आधुनिक भारतीय रंगमंच की क्लासिक कृतियों के रूप में शुमार होते हैं. उनके नाटकों में प्रमुख हैं- शांतता! कोर्ट चालू आहे (1967), सखाराम बाइंडर (1972), कमला (1981), कन्यादान (1983)। उनके नाटक ‘घासीराम कोतवाल’ (1972) की मूल मराठी और अनूदित रूप में देश और विदेश में 6 हज़ार से ज्यादा प्रस्तुतियाँ हो चुकी हैं।

विजय तेंडुलकर को नेहरु फ़ेलोशिप (1973-74), पद्म भूषण (1984), फिल्मफेयर आदि से सम्मानित किया गया।

तेंडुलकर ने बच्चों के लिए 11 नाटकों की रचना की है। उनकी कहानियों के चार संग्रह और सामाजिक आलोचना व साहित्यिक लेखों के पाँच संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। तेंडुलकर ने दूसरी भाषाओं से मराठी में अनुवाद किये हैं, जिसे तहत नौ उपन्यास, दो जीवनियाँ और पाँच नाटक भी उनके कृतित्व में शामिल हैं। दूरदर्शन के लिए भी उन्होंने धारावाहिक लिखे हैं जिनमें स्वयंसिद्ध, प्रिय तेंडुलकर टॉक शो चर्चित रहे। विजय तेंडुलकर ने 20 के करीब फ़िल्मों का लेखन किया जिनमें निशांत, मन्थन, आक्रोश, अर्धसत्य आदि शामिल हैं।

वाणी प्रकाशन से प्रकाशित उनके नाटक :

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चीफ मिनिस्टर
अपने प्रत्येक नाटक की भाँति तेंडुलकर का नाटक ‘चीफ मिनिस्टर’ भी एक ज्वलन्त, गम्भीर, सत्य घटना को उद्घाटित करता है। राजनीति की कुटिल चालों में सत्य के पोषक, सदाचारी, सब धराशायी हो जाते हैं, भस्म हो जाते हैं। यह नाटक इस कटु सत्य को प्रदर्शित करता है कि सरकार निरपराध लोगों पर गोलियाँ चलवाती है, निर्दोष व्यक्ति अपने को जिन्दा जला डालते हैं लेकिन सरकार के कानों पर जूँ नहीं रेंगती, बल्कि वह समाज के भ्रष्ट सरमायेदारों और अपराधियों को संरक्षण देती है और इसी भ्रष्टाचार की मिलीभगत के दम पर अपना अस्तित्व बनाये रखती है। भाषा, शिल्प अति प्रभावकारी और सरल है।

लेखक : विजय तेंडुलकर
अनुवाद : ललित देसाई
पृष्ठ : 90
ISBN : 9789387409156

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चौपट राजा तथा अन्य बाल नाटक
इसकी शैली अति मनोरंजक तथा भाषा अति सरल है। भाषा बाल दर्शकों को गुदगुदाने में पूर्ण सफल है साथ ही बच्चों को शिक्षा देने का भी प्रयास किया गया है। ‘चिड़िया का बंगला’ के माध्यम से बच्चों को यही बताने का प्रयास किया गया है कि मानव को अपने समाज के अनुसार ही व्यवहार करना चाहिए। ‘चौपट राजा’ में यथा राजा तथा प्रजा का अति सरस, सहज भाषा में वर्णन है। व्यंग्यात्मक रूप में लिखा यह नाटक अपनी शैली, भाषा के सहारे अपने उद्देश्य में पूर्ण सफल है। ‘ताशेवाला’ के माध्यम से गाँव के लड़कों की काम के प्रति चाह दिखाने का प्रयास है। गाँव का एक धनिक अपनी बेटी की शादी में गाँव के ताशेवाले की उपेक्षा कर शहर का बैंड बुलाने की कोशिश करता है लेकिन एक ताशेवाला सियार की नकली आवाज़ निकालकर, भूतों का भय दिखाकर शहरी बैंड को भगा देता है।

अनुवाद : माधुरी ब्रम्हे
पृष्ठ : 60
ISBN : 9789387409163

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vijay tendulkar kanyadan natak

कन्यादान
‘कन्यादान’ नाटक सीधी रचना होते हुए भी अन्य नाटकों की भाँति विवादास्पद है। यह नाटक इसके एक पात्र दलित लेखक आठवले का ही नाटक नहीं है, न ही पिछली पीढ़ी के समाजवादी विचार के हिमायती समाजवादी कार्यकर्त्ता नाथ देवलालीकर का और ना ही नाथ की पुत्री ज्योति का है, जो नाटक के धधकते अग्निकुण्ड में अपनी आहुति दे देती है। यह नाटक है हमारे यहाँ मान्यता प्राप्त  वैचारिक धारणा और कठोर यथार्थ के बीच नये सिरे से उभरते प्राणलेवा संघर्ष और उसकी प्रवृत्तियों का। सामाजिक परिवर्तन के मन्थन में लगातार टकराते-टूटते बनते हुए भारतीय समाज के सामने मुँह बाये खड़ी एक भीषण समस्या का झुलसाता उद्घाटन है- कन्यादान।

अनुवाद : वसन्त देव
पृष्ठ : 84
ISBN : 9789387409286

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