‘हर आदमी अन्दर से खिलाड़ी होता है’ -राकेश मढ़ोतरा

पहली बार ऐसा हो रहा है कि खेल पर कोई उपन्यास लिखा गया है.
विश्व पुस्तक मेले में वाणी प्रकाशन के स्टॉल पर राकेश मढ़ोतरा के उपन्यास 'अश्याम' का लोकार्पण व चर्चा हुई। यह उपन्यास खेल पर आधारित है।

लॉन-टेनिस खेल से प्रेरित होकर व उनके जीवन पर आधारित एक व्यक्ति को राकेश मढ़ोतरा ने ‘अश्याम’ उपन्यास का पात्र बनाया है। लेखक ने बताया कि पुस्तक में दो पात्र हैं -असलम व श्याम। दोनों को मिलाकर यह कृति लिखी गयी। 'अश्याम’ का अर्थ होता है ‘प्यारा'। जहाँ हर किसी से प्रेम हो और कोई मतभेद न हो।'

वाणी प्रकाशन की निदेशक अदिति माहेश्वरी-गोयल कहती हैं कि पहली बार ऐसा हो रहा है कि खेल पर कोई उपन्यास लिखा गया है। राकेश मढ़ोतरा कहते हैं कि अश्याम के पात्रों से मैं इमोशनली कनेक्ट हूँ। हर आदमी अन्दर से खिलाड़ी होता है, वह अपने जीवन में खेलता रहता है।

उन्होंने कहा कि अपनी भावना को समझने के लिए किसी माध्यम का सहारा लेना पड़ता है। यह कहा जाता है कि लॉन-टेनिस धनी लोगो का खेल है। उपन्यास का मुख्य पात्र ग़रीब बस्ती में रहता है और टेनिस सिखाता है।

राकेश मढ़ोतरा के साथ इस संवाद में लीलाधर मंडलोई, वाणी प्रकाशन के प्रबन्ध निदेशक अरुण माहेश्वरी ने भी शिरकत की।

~समय पत्रिका.