कुछ शब्द, कुछ लकीरें : सादगी, सरलता और गहराई

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बहुत अंदर तक महसूस किया जाना शब्दों की ताकत का अहसास है.
कविता की रचना भावनाओं के धागे में लिपटी हुई होती है। कवि के शब्द विचारों की नदियों में बहते हुए पन्नों में समा जाते हैं। ऐसा कुछ बुना जाता है जो बेहद महीन है, जो बेहद संजीदा है, और जिसे सिर्फ शब्दों में बयान उतनी बेहतरी से किया जा सकता है। उन शब्दों को महसूस किया जा सकता है; बहुत अंदर तक महसूस किया जाना भी शब्दों की ताकत का अहसास ही है। विश्वजीत की कविताओं में जो रस है, वह मन के खाली कोनों को तृप्त कर देता है। प्यास जो बाकी नहीं, रस जो बह निकले और उत्सुकता जो थमती नहीं, बल्कि ऐसा लगता है जैसे जागते रहे इन पन्नों को पढ़ते हुए। बार-बार कुछ ऐसा जिसे पढ़ता रहे मन, गुनगुनाता रहे कोई इस तरह की लगातार खो जाने का मन करे, जिसे 'रमना' कहते हैं।

‘मेरा जीवन’ कविता में विश्वजीत ने उन एहसासों का परिचय करा दिया है जिस जीवन को हर कोई जानता है। देखें :

मेरा जीवन तो बन चुका
पतझड़ के बाद के दरख़्तों के समान
जो अपनी नंगी हड्डियां
चाहते हुए भी 
छुपा न सकें.

'बूढ़ा क़स्बा' कविता से :

सफ़ेद धूल मानो पके हुए बाल
दीवारों की दरारें मानो
चेहरे पर आयु और अनुभव की लकीरें
डगमगाती गलियां मानो लड़खड़ाते क़दम
गिरते हुए मकान मानो ढलती हुई जवानी
तालाब आधा सूखा जैसे आंखों में खुश्की छाई हुई

इन्हीं से बना है
बूढ़ा
हमारा क़स्बा.

यह कविता-संग्रह बेहद पठनीय है। यहां कविताएं यथार्थ की हैं, प्रेम बरसा है यहां, अकेलापन पसरता है, ज़िन्दगी का रंग-बिरंगापन है, प्रकृति है और वह सब जो ज़िन्दगी की गाड़ी चलाता है। कुल मिलाकर विश्वजीत की ये कविताएं जीवन के अनगिनत रंगों की कहानी बयान करती हैं। यहां शब्दों की चहक ऐसी है जो जीवन की बारीकियों से हमें अवगत करा रही है।

यहां कविताओं के साथ चित्र भी दिए गए हैं। इससे कविता और चित्रों का सामंजस्य बनता है जो एक अलग तरह का अनुभव उपलब्ध कराता है।

विश्वजीत की कविताओं में सादगी है, सरलता है, और वह गहराई भी जिसे समझना तृप्त होना है।

साथ में पढ़ें : ज़िन्दगी के सच को बयान करतीं ‘कुछ धुंधली तस्वीरें’

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