अवतरण : भारतीय इतिहास की जटिलता और आकर्षण का सटीक परिचय

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बेहद रोचक तरीके से किताब में भारत की पचास ऐतिहासिक शख्सियतों के बारे में जानकारी दी गई है.
अवतरण : भारत के 50 ऐतिहासिक व्यक्तित्व' विद्वान लेखक सुनील खिलनानी की ऐसी पुस्तक प्रकाशित हुई है जिसमें पचास ऐसे व्यक्तित्वों का ऐतिहासिक दृष्टि से परिचय कराया गया है जिन्होंने भारत के साथ दुनियाभर में अपनी छाप छोड़ी है। इन शख्सियतों के कई महत्वपूर्ण लेकिन अचर्चित पक्षों पर लेखक ने प्रकाश डालकर इसे अत्यंत रोचक और पठनीय बना दिया है।

हालांकि इतिहास राजा, महाराजाओं, दा​र्शिनिकों, संत-महात्माओं, कवियों, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, योद्धाओं, नेताओं, उद्योगपतियों और विद्वानों से भरा पड़ा है लेकिन लेखक ने उनमें से अलग-अलग तरह के व्यक्तित्वों में से केवल पचास के बारे में गूढ़ अध्ययन के बाद बहुत कुछ लिखा है। इनमें बुद्ध, महावीर, गुरु नानक, कबीर, शंकर व मीराबाई जैसे संत और भक्त व्यक्तित्व हैं, वहीं पाणिनी, कौटिल्य, चरक, आर्यभट्ट जैसे अपने-अपने क्षेत्र के प्राचीन स्तंभ शामिल हैं। अकबर, शिवाजी, दारा शिकोह, राजाराममोहन राय, ज्योतिबाराव फुले, विवेकान्नद, पेरियार, बिरसा मुंडा, श्रीनिवास रामानुजन, एनीबेसेंट, टैगोर, गाँधी, जिन्ना, सुभाष चन्द्र बोस, इंदिरा गाँधी, चौ. चरण सिंह जैसी हस्तियों के साथ ही मन्टो, राजकपूर, शेख अब्दुल्ला, एम.एफ. हुसेन और धीरुभाई अम्बानी के जीवन और संघर्ष पर काफी जानकारी दी गई है।

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पुस्तक में विवेकानन्द को अमेरिकी मांसाहारी आदत का समर्थक बताते हुए कहा गया है -'विवेकानन्द को अमेरिकी आदतों ने प्रभावित किया, जिनमें वहां के लोगों द्वारा गोमांस खाना भी शामिल था और उन्होंने अपने देशवासियों को सलाह दी कि वे भी अपने शरीर को मजबूत रखने के लिए ऐसा करें। उन्होंने अमेरिका की शरीर-सौष्ठव संस्कृति को भी अपनाया और व्यायाम के तकनीकों को हिंदू धर्म की परिपाटी में रखा।'

भारत और उसके अतीत की यात्रा करते हुए खिलनानी मात्र इतिहास ही नहीं बल्कि उससे भी अधिक जानकारी हमारे सामने लाते हैं। रॉकेट लॉन्च और आयुर्वेदिक कॉल सेंटर में, बस्तियों के मंदिरों और बॉलीवुड स्टूडियो में, कैलिफ़ोर्निया के समुदायों और कीचड़ भरे बंदरगाहों में वे उन स्त्री-पुरुषों की निरंतर और अक्सर आश्चर्यजनक प्रसंगिकता का पता लगाते हैं, जिन्होंने भारत और विश्व को आकर दिया। ये कहानियाँ पाठकों को जानकारी देंगी, प्रभावित करेंगी और उनका मनोरंजन करेंगी।

कई अन्य हस्तियों के बारे में भी चौंकाने वाली लेकिन तथ्यपरक जानकारी पुस्तक में दी गयी है। अमीर खुसरो के बारे में लेखक कहते हैं -’आज भारत के मुठ्ठी भर विद्वान ही खुसरो की फ़ारसी को पढ़ सकते हैं। ईरान और अफ़गानिस्तान में उन्हें पढ़ने वालों की तादाद कहीं ज़्यादा हो सकती है, लेकिन तूती-ए-हिन्द को एक भारतीय लेखक के रूप में देखा जाता है, जिन्हें वहाँ के साहित्यिक दायरे में शामिल नहीं किया जाता। उनकी नियति उन लोगों की तरह है, जिनके साहित्यिक संसार के परों को राष्ट्रीय पहचान की सीमाओं ने कतर दिया है। हालाँकि आज भी उत्तर भारत में लाखों लोग राहत के लिए अमीर खुसरो के हिंदवी गीतों की विषादपूर्ण सुंदरता और उनकी दरगाह की शरण में आते हैं।’

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बौद्ध धर्म और अम्बेडकर के बारे में सुनील खिलनानी लिखते हैं कि अम्बेडकर अपने स्वयं के बुद्ध को गढ़ रहे थे जो काफी हद तक एक सामाजिक क्रांतिकारी थे या फिर एक प्राचीन भारतीय रुसो। आधुनिक भारत के अन्य संस्थापकों की तरह वे भी ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को फिर से नया जीवन देकर उनका इस्तेमाल भारतीय समाज की समस्याओं के हल के लिए कर रहे थे।

लेखक ने महावीर और बुद्ध के उपदेशों में समानताओं का उल्लेख करते हुए लिखा है कि दोनों ने ही प्रारंभिक हिंदू ग्रंथों, वेदों की मूलभूत मान्यताओं का विरोध किया। पाणिनी की चर्चा करते हुए सुनील खिलनानी लिखते हैं कि पाणिनी के काम और कम्प्यूटर प्रोग्रामर्स के काम करने के तरीके के बीच कुछ समानताएं हैं, लेकिन कम्प्यूटर कोड को उनके व्याकरण की सीधी विरासत मानना काल्पनिक बात है।

एक जगह लेखक ने लिखा है कि पाकिस्तानी सेना में नौजवान अफ़सरों को कौटिल्य को पढ़ने को कहा जाता है ताकि वे भारतीय दिमाग की तथाकथित कुटिलता को समझ सकें।

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अकबर के बारे में लेखक बताते हैं कि उसने नमाज़ और कट्टर इस्लामी रीतियों को छोड़ दिया था। वह सूर्य की उपासना करने लगा। अपने दरबार में अग्नि अनुष्ठान किए और एक अलग धार्मिक आस्था, दीन-ए-इलाही शुरु की।

इस पुस्तक में मलिक अंबर का जिक्र भी किया गया है जिसकी कहानी गुलामी को लेकर हमारी मान्यताओं को उलझा देती है। ‘अवतरण’ में हमें शाजहाँ के बड़े बेटे दारा शिकोह को भी जानने का मौका मिलता है। दारा ने उपनिषदों का फ़ारसी में अनुवाद किया था। उन्हें गुलामों की टोली ने मार दिया था। उनकी मौत के बाद उपनिषद और अन्य संस्कृत अनुवाद हिंदू धर्म और इस्लाम के बीच महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुए।

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सुनील खिलनानी ने मशहूर उद्योगपति धीरुभाई अंबानी को ‘बड़ी शार्क’ बताया है। अंबानी ने सरकार का बेहतर इस्तेमाल किया। वे इतनी तेजी से सफलता की सीढियाँ चढ़ते गए जितना भारत के किसी व्यापारी ने नहीं किया। अख़बारों में जब उनके खुलासे हुए तो अंबानी को दिल का दौरा पड़ा।

इस पुस्तक में सुनील खिलनानी ने बेहद रोचक तरीके से भारत की पचास ऐतिहासिक शख्सियतों के बारे में हमें जानकारी दी है। यह बेहद पठनीय किताब है।

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