अम्मा : उत्तर-पश्चिम यूपी की परंपराओं की कहानी

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'अम्मा' में राधा और गुरुमां जैसे चरित्रों को इस कुप्रथा के खिलाफ मजबूत नायिकाओं के रुप में प्रस्तुत किया है.
रज्जन शिंघल का उपन्यास 'अम्मा' बीसवीं सदी में अम्माओं के वर्चस्व और दबदबे की कहानी है। इस पारिवारिक उपन्यास में केवल अकेली 'अम्मा' ही नायिका नहीं है बल्कि कई अन्य महिलायें प्रधान भूमिका में हैं। उपन्यास में अविभाजित उत्तर प्रदेश के उत्तर पश्चिम क्षेत्र जिसमें हरिद्वार से मेरठ तक का क्षेत्र आता है, के समाज के रीति-रिवाजों का उद्घाटन किया गया है।

जातिवाद तथा रुढ़िवादी परंपराओं से बंधे इस क्षेत्र की प्रथाओं का पात्रों के माध्यम से लेखक पाठकों को अवगत कराते हुए अनाथ तथा माता-पिता द्वारा प्रताड़ित कुछ बच्चियों के संघर्ष, साहस तथा संतोष द्वारा कई गैरजरुरी परंपराओं को धराशायी कराने की कहानी 'अम्मा' में प्रस्तुत करते हैं।

जाति 21वीं सदी में हमारे देश में एक बड़ा मुद्दा है। हमारा समाज इससे उबर नहीं पा रहा। 'अम्मा' नामक इस पुस्तक में राधा और गुरुमां जैसे चरित्रों को लेखक ने इस कुप्रथा के खिलाफ मजबूत नायिकाओं के रुप में प्रस्तुत किया है। कहानी को रोचक बनाने के लिए पात्रों में कई जगह जिज्ञासापूर्ण वाद-विवाद के संवाद दिए हैं। साथ ही क्षेत्रीय लोकोक्तियां लेखन में रोचकता पैदा करती हैं। साधारण हिन्दी में पठनीय पुस्तक है।

अम्मा
लेखक : रज्जन शिंघल
प्रकाशक : ज़ोरबा बुक्स
पृष्ठ : 215

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