'मुश्किलें हमें हराती हैं, पर संघर्ष करने वाला हमेशा जीतता है'

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सफल लोगों की संगत और उनका मार्गदर्शन हमें उन्नति की राह में सहयोग करता है.
सुरेश मुरलीधर वाघ की पुस्तक 'चले... सफलता की ओर प्रेम से, आनंद से' एक प्रेरणादायक किताब है। लेखक ने अपने जीवन अनुभवों से सफलता हासिल करने तथा जीवन के पथ पर आगे बढ़ने के विषय में विस्तार से चर्चा की है। इस पुस्तक का हिंदी में प्रकाशन मार्क माय बुक के सह-उपक्रम बुकमित्र पब्लिशर्स ने किया है।

लेखक के अनुसार उत्तम कार्य करने से अच्छा फल मिलता है। चाहें आप खेती-किसानी या कोई भी अन्य व्यवसाय करें, मगर उसमें सफलता तभी मिलती है जब आपका कार्य मन से किया गया हो, उसमें प्रेम शामिल हो। इससे वह उत्तम हो जाता है जो हमें जीवन में धन, यश और तरक्की के अवसर प्रदान करता है। प्रेम और आनंद से किया गया कोई भी कार्य बेकार नहीं जाता। इसलिए लेखक सुरेश वाघ का मत है कि सफलता के लिए खुद को इस कदर विकसित करें कि आप जो भी काम करें उसे पूरी तन्मयता और ईमानदारी के साथ करें। आप निश्चित सफल हो जायेंगे।

इस पुस्तक में यह भी कहा गया है कि सफल लोगों की संगत और उनका मार्गदर्शन हमें उन्नति की राह में सहयोग करता है। ऐसा करने पर हम अपने लक्ष्य को आसानी से पा लेते हैं। लेखक ने एक अंधे व्यक्ति का उदाहरण देकर समझाया है कि उनकी दुर्घटना नहीं होती। इसका कारण यह बताया है कि वे आँखों वाले व्यक्ति पर शत-प्रतिशत भरोसा कर आगे बढ़ते हैं, जिसका परिणाम होता है उनकी सफलता। इसलिए सफल और अच्छे लोगों की संगत, उनका साथ हमें भी सफलता की राह पर ले जा सकता है।

व्यवसाय को बेहतर बनाने के लिए भी लेखक ने टिप्स दिए हैं। वे कहते हैं कि एक अच्छे व्यवसायी को तेज़ दिमाग वाला होना चाहिए। उसे यह समझ होनी चाहिए कि कौन-सा उत्पाद उपभोक्ता पसंद कर रहे हैं यानी किस प्रोडक्ट की मार्केट में डिमांड है। उसे समाज के लिए उपयोगी वस्तुओं का निर्माण करना चाहिए। ऐसा करके ही वह अपने जीवन का शिल्पकार हो सकता है। वह दूसरों के लिए भी प्रेरणा सिद्ध होगा।

सुरेश वाघ ने खरगोश और कछुए का उदाहरण देकर समझाया है कि कुशल टीम-वर्क के बल पर अपने व्यवसाय को ऊँचाई पर आसानी से ले जाया जा सकता है।

संघर्ष के बिना सफलता नहीं मिलती। लेखक का कथन सटीक है -'मुश्किलें हमें हराती हैं, पर संघर्ष करने वाला हमेशा जीतता है।' इसलिए मुश्किल से घबराना नहीं चाहिए, उसका सामना करना चाहिए। बाधाएँ हमें रोकती जरूर हैं, मिटाती नहीं। मिटते हम तब हैं, जब उनसे मुकाबला करने की हम हिम्मत नहीं जुटा पाते। मुश्किलों का सामना बेहद जरूरी है। सफल लोग ऐसा ही करते हैं। तभी राहें उनके लिए खुलती हैं। वे अपने जीवन को उत्कृष्ट बनाकर दूसरों को प्रेरित करते हैं।

किताब बताती है कि जैसा हम बोलते, देखते और करते हैं, वैसा हमारे जीवन में होता है। जैसा बोओगे, वैसा पाओगे।

एक निश्चय के साथ आगे बढ़ना चाहिए। लेखक ने कहा है कि इंसान को मालूम होना चाहिए कि उसे कहाँ जाना है, उसका लक्ष्य क्या है, और मजबूत इच्छाशक्ति से वह किसी भी मजबूत दीवार को धराशायी कर सकता है।

सकारात्मकता पर विशेष जोर देते हुए सुरेश वाघ लिखते हैं कि जीवन में सफल वही होते हैं जिनकी सोच में नकारात्मक विचार नहीं होते, जो हर चीज़ पर सकारात्मक नज़रिया रखते हैं।

लेखक ने 'धन्यवाद' देने पर भी चर्चा की है। हमें हर उस इंसान, बात या वस्तु का आभारी होना चाहिए जो हमें प्राप्त हुई है। हमें नम्रता से अपनी बात रखनी चाहिए। यही प्रेम और आनंद से जीवन जीने के सूत्र हैं। लेखक ने कहा है कि हम खुद बदलेंगे तो समझ भी बदलेगा। साथ ही लेखक ने कई उदाहरण देकर सफलता के उपयोगी मंत्र दिए हैं। यह किताब जीवन की सीखों से भरी है।

चले... सफलता की ओर प्रेम से, आनंद से
लेखक : सुरेश मुरलीधर वाघ
प्रकाशक : बुकमित्र पब्लिशर्स
पृष्ठ : 135

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