शर्मिष्ठा : पौराणिक नायिका के संघर्ष की मनोरंजक दास्तान

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शर्मिष्ठा असुर सम्राट वृषपर्वा की पुत्री थी जो असीम सुन्दर, न्यायकारी, सहनशील तथा बेहद प्रभावशाली थी.
पौराणिक कथा पात्रों को लेकर कई प्रतिष्ठित लेखक-लेखिकाओं ने बहुत ही मनोरंजक उपन्यास लिखे हैं। अनेक मिथकों और कल्पनाओं को एकाकार किए इन उपन्यासों को पाठकों ने बहुत पसंद किया है। इसी क्रम में अणुशक्ति सिंह ने 'शर्मिष्ठा : कुरु वंश की आदि विद्रोहिणी' शीर्षक से एक पुस्तक लिखी है।

उपन्यास के रुप में लिखी पौराणिक कथाओं पर आधारित इस पुस्तक को वाणी प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। ब्रह्म पुराण के अनुसार शर्मिष्ठा पाण्डवों की पूवर्जा मानी जाती है। शर्मिष्ठा असुर सम्राट वृषपर्वा की पुत्री थी जो असीम सुन्दर, न्यायकारी, सहनशील तथा बेहद प्रभावशाली थी। असुरों के गुरु शुक्राचार्य के आश्रम में विद्याध्ययन के दौरान देवताओं के गुरु ब्रह्स्पति के पुत्र कच और शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी से शर्मिष्ठा की मित्रता हुई, ये सभी हमउम्र थे।

इस उपन्यास की कथा इन तीनों के इर्द-गिर्द ही विशेष रुप से चलती है। जबकि हस्तिनापुर के तत्कालीन क्षत्रिय राजा ययाति भी एक महत्वपूर्ण पात्र हैं।

शर्मिष्ठा : कुरु वंश की आदि विद्रोहिणी

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तत्कालीन वैवाहिक परम्पराओं के विपरीत ययाति और देवयानी का प्रेम विवाह होता है। इससे जुड़ी एक अत्यंत रोचक कहानी उपन्यास को और भी मनोरंजक बना देती है। वास्तव में शर्मिष्ठा ही इस पौराणिक उपन्यास कथा की नायिका है। उसका संघर्षपूर्ण जीवन तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था में नारी के साथ भेदभाव और व्यवस्थापरक अन्याय का प्रमाण भी है। शर्मिष्ठा अपनी मासूम संतान की सुरक्षा और लालन-पालन में जिस संघर्ष और कष्टों का सामना करती है, उसमें भारतीय माताओं की छवि स्पष्ट होती है। लेखिका द्वारा उपन्यास की भाषा-शैली और पात्रों की संवादीय गुणवत्ता को लगातार पठनीय बनाये रखा है। पाठक गंभीरता से कहानी को मनोरंजन के साथ पढ़ता चला जाता है।

शर्मिष्ठा : कुरु वंश की आदि विद्रोहिणी
लेखिका : अणुशक्ति सिंह
प्रकाशक : वाणी प्रकाशन
पृष्ठ : 150

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