शिखण्डी : महाभारत के चर्चित पात्र पर रोचक उपन्यास

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वाणी प्रकाशन ने महाभारत के प्रमुख पात्र शिखण्डी से सम्बद्ध उपन्यास को प्रकाशित किया है.
साहित्य की सभी प्रमुख विधाओं पर सफलता के साथ कलम चलाने वाले साहित्य मनीषी और कालजयी उपन्यासकार डॉ. नरेन्द्र कोहली ने 'शिखण्डी' नामक पुस्तक पाठकों के सामने रखी है। वाणी प्रकाशन ने महाभारत के प्रमुख पात्र शिखण्डी से सम्बद्ध उपन्यास को प्रकाशित किया है।

नरेन्द्र कोहली ने पौराणिक और एतिहासिक चरित्रों से जुड़ी गुत्थियों को स्व विवेक और कल्पना शक्ति के सहारे सुलझाने की कोशिश की है। उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक इतिहास और पौराणिक काल के पात्रों पर बहुत ही रोचक तथा तर्कपूर्ण ढेर सारे उपन्यास लिखे हैं। उसी श्रंखला में 'शिखण्डी' उपन्यास लिखा गया है। विद्वान लेखक की भाषा शैली रोचक तथा प्रवाहमान है। पाठक उसके साथ प्रवाहित होकर आनन्द के साथ उपन्यास पढ़ना शुरु करता है और पढ़ते-पढ़ते पुस्तक के पार निकल जाता है।

...रानी को उस पर दया आयी। वस्तुत: उसकी यह पुत्री, माता की परि​स्थितियों के दुर्भाग्य के जाल में फँस गयी थी; और उसी को अपनी नियति मानकर तदनुरुप जीवन व्यतीत कर रही थी। यह शिखण्डिनी, जिसे इस समय या तो अपने पति के घर होना चाहिए था, अथवा पति के स्वप्न देखने चाहिए थे-क्षत्रिय राजकुमार के समान आखेट की तैयारी कर रही थी। ...जिसे अपने रुप को सँवारकर, पुरुष मन को मथने का प्रयत्न करना चाहिए था, वह विभिन्न व्यायामों, मुद्राओं, अभ्यासों तथा वस्त्रों की सहायता से अपने नारी सौन्दर्य को नष्ट करने पर लगी थी। जिन समृद्ध उरोजों और नितम्बों को, उनके आकार-प्रकार को एक नैसर्गिक आकर्षण देना चाहिए था, वे उसके कठोरता से बँधे वस्त्रों में स्वयं को विलीन करने को बाध्य थे; जिन नैनों को कटाक्ष बरसाने चाहिए, वे अपनी चपलता त्याग, गम्भीरता के जाल बुन रहे थे; जिन अधरों पर संसार का मुधरतम संगीत होना चाहिए था, उनको वह अपनी दृढ़ता के प्रतिनिधि बनाने पर तुली थी...
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शिखण्डी से जुड़ी कथाओं को अलग परिप्रेक्ष्य में रखते हुए, महाभारत के पात्रों के आपसी संवादों को पठनीय तथा तर्कपूर्ण शैली में लिखा गया है। हालांकि पूरी कथा में पाण्डव पक्ष की जोरदार पैरवी और कौरवों की जबर्दस्त निन्दा के लिए लेखक ने एक पक्षीय लेखन किया है। बल्कि यह कहना और भी न्यायसंगत होगा कि डॉ. नरेन्द्र कोहली की कल्पनाशक्ति बहुत ही अच्छी है, जो एतिहासिक घटनाओं और पौराणिक मिथकों को एकाकार करने में कहीं तक भी जा सकती है। उनके विचारों को पाठकों का एक बड़ा वर्ग गंभीरता से पढ़ता है। शिखण्डी भी पाठकों के बीच लोकप्रिय होगा, हमारा यह विश्वास है।

शिखण्डी
लेखक : नरेंद्र कोहली
प्रकाशक : वाणी प्रकाशन
पृष्ठ : 240

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