बेस्टसेलर पुस्तक 'मेरी फ़ितरत है मस्ताना' के चौथे संस्करण का लोकार्पण समारोह

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'मेरी फ़ितरत है मस्ताना' का चौथा संस्करण पाठकों के लिए उपलब्ध है.

वाणी प्रकाशन ग्रुप द्वारा प्रकाशित प्रसिद्ध कवि, शायर, गीतकार और पटकथा लेखक मनोज 'मुंतशिर' का बहुचर्चित ग़ज़ल और कविता संग्रह 'मेरी फ़ितरत है मस्ताना' बेस्टसेलर बन गया है और किताब ने अपना एक ख़ास मुक़ाम बना लिया है। पुस्तक का चौथा संस्करण पाठकों के लिए अब उपलब्ध है जिसका लोकार्पण समारोह वाणी प्रकाशन ग्रुप द्वारा इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के मल्टीपर्पस हॉल में 6 फ़रवरी 2021,शाम 6:00 बजे आयोजित किया जायेगा।

इस पुस्तक का पहला संस्करण वर्ष जनवरी 2019 में प्रकाशित हुआ था। दूसरा संस्करण तीन महीने में ही अप्रैल-2019 पाठकों के समक्ष था। पाठकों के प्रेम के कारण ही जनवरी 2020 में इस पुस्तक का तीसरा संस्करण वाणी प्रकाशन ग्रुप से प्रकाशित हुआ था और अब जनवरी 2021 में इस पुस्तक का चौथा संस्करण भी पाठकों के लिए उपलब्ध है।

'मेरी फ़ितरत है मस्ताना' के चौथे संस्करण के लोकार्पण समारोह में सूत्रधार की विशेष भूमिका में युवा पत्रकार प्रतीक्षा पाण्डेय उपस्थित रहेंगी। प्रतीक्षा पाण्डेय लेखक और एंकर भी हैं। वे इंडिया टुडे ग्रुप के ' ‘द लल्लनटॉप' पर प्रसारित होने वाले बहुचर्चित शो 'ऑड नारी' की एंकर हैं। 'ऑड नारी' महिलाओं और स्त्रीवादी मुद्दों से सम्बंधित एक कार्यक्रम है जिसकी पहचान आज प्रतीक्षा पाण्डेय बन चुकी हैं। वे 'Meow' नाम से स्त्री विषयक एक वीडियो और टेक्स ब्लॉग भी चलाती हैं। प्रतीक्षा लैंगिक समानता के दृष्टिकोण से समकालीन मुद्दों पर लगातार लिख रही हैं। लोकप्रिय साहित्य और कविता में उनकी सक्रिय रुचि है।

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कार्यक्रम में सह-आयोजक के रूप में 'द लल्लनटॉप' उपस्थित रहेगा।

सर्वाधिक लोकप्रिय गीत 'तेरी मिट्टी', 'गलियाँ', 'तेरे संग यारा', 'कौन तुझे यूँ प्यार करेगा', 'मेरे रश्के-क़मर', 'मैं फिर भी तुमको चाहूँगा' जैसे दर्जनों लोकप्रिय गीत लिखने वाले मनोज 'मुंतशिर' फिल्मों में शायरी और साहित्य की अलख जगाए रखने वाले चुनिंदा कलाकारों में से एक हैं। फिल्मी पंडित और समालोचक एक स्वर में यह मानते हैं कि बाहुबली को हिन्दी सिनेमा की सबसे सफल फ़िल्म बनाने में मनोज 'मुंतशिर' के लिखे हुए संवादों और गीतों का भरपूर योगदान है। वे दो बार आइफा अवॉर्ड, उत्तर प्रदेश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'यश भारती', 'दादा साहब फाल्के एक्सीलेंस अवार्ड' समेत फिल्म जगत के तीस से भी ज़्यादा प्रतिष्ठित पुरस्कार जीत चुके हैं। रुपहले पर्दे पर राज कर रहे मनोज चिचड़े अदब में है। देश-विदेश के लाखों युवाओं को शायरी की तरफ़ वापस मोड़ने में मनोज की भूमिका सराहनीय है।

'मेरी फ़ितरत है मस्ताना' उनकी अन्दरूनी आवाज़ है। जो कुछ वे फिल्मों में नहीं लिख पाये, वह सब उनके पहले कविता संकलन में हाज़िर है।